Monday, 12 August 2013

आज 12 अगस्त को अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस है। पूरे विश्व में हर क्षेत्र में भारत का युवा अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहा है। अपनों से दूर विदेश की धरती पर करियर को परवान चढ़ा रहे इन युवाओं में अपनी माटी की कसक साफ दिख रही है।
युवा शक्ति का जिक्र हो तो आमतौर पर उसे गलत संदर्भ में पेश किया जाता है। युवाओं को अराजकता, हुड़दंग और 'कोई कहे, कहता रहे' जैसे अर्थों में समझा जाता है। लेकिन यह सोच पूरी तरह गलत है। युवा ही परिवर्तन लाते हैं। ऐसा इसलिए कि युवाओं की सोच नई होती है। युवा यह नहीं सोचता कि क्या होना चाहिए, बल्कि यह सोचता है कि क्या हो सकता है।
युवा होने का मतलब केवल बीयर पीना या तेज बाइक चलाना नहीं है, जैसा कि आम तौर पर समझा जाता है। वे युवा ही थे, जो अन्ना के आंदोलन की मुख्य ताकत बने। वे युवा ही थे, जिन्होंने रंग दे बसंती फिल्म के लिए लिखे मेरे गाने 'अभी-अभी हुआ यकीं कि आग है मुझमें कहीं' को पसंद किया और युवा शक्ति पर केंद्रित उस फिल्म को हिट कराया। इसलिए यह मानना कि युवाओं में गहराई नहीं होती या वे गंभीर नहीं होते, सही नहीं है।

आंधी आये, तूफ़ान आये, लक्ष्य  साधे रखना ,
आशाओं का दीप तुम, दिल में जलाये रखना
दुःख सुख की धूप छाँव का डट कर हो सामना
मिलते न फूल सर्वदा काँटों से भी होता गुजरना

उम्मीदों के समंदर में गोते लगाये रहना
आशाओं का दीप तुम, दिल में जलाये रखना
सुमित गुप्ता

No comments:

Post a Comment