यूपी में सपा का गुंडाराज
मुलायम के प्रधानमंत्री बनने के सपने पर फिर सकता है पानी
यूपी में समाजवादी पार्टी को बहुमत मिलने के बाद से ही जिस तरह से एक के बाद एक हिंसा की खबरें आ रही हैं उससे आशंका जताई जाने लगी है कि यूपी में कहीं गुंडाराज की वापसी तो नहीं हो रही है।
अभी हाल ही में कुछ दिन पूर्व ही बछरावां के विधायक रामलाल अकेला के दो बेटों पर रायबरेली में जबरन जमीन पर कब्जा करने के इरादे से एक डॉक्टर के मकान को स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर ढहा दिया। वहीं, सीतापुर के विधायक महेंद्र सिंह को गोवा में पुलिस ने बार बालाओं के साथ गिरफ्तार किया था जिसके बाद सीएम नाराज चल रहे थे। महेंद्र सिंह समेत छह लोगों को गोवा में एक डांस बार में रंगरंगेलियां मनाते आपत्तिजनक स्थिति में पकडा गया था। छापे में पकडी गई छह लडकियों को पंजाब, दिल्ली, मुंबई, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ राज्यों से लाया गया था। राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो चुकी है. लगातार हो रहे घटनाक्रमों ने न केवल प्रदेश में गुंडाराज की वापसी को और पुख्ता किया है बल्कि अखिलेश के सुशासन के सारे चुनावी वादों को भी धता बता दिया है.
अब सवाल यह उठता है कि क्या समाजवादी पार्टी को सत्ता देकर जनता ने गलती की है. 2012 विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव सपा की तरफ से मुख्य चेहरा थे. उत्तर प्रदेश की जनता भी विलायत से पढ़ कर आए अखिलेश से हजारों उम्मीदें लगाए बैठी थी कि यह राज्य में बदलाव लेकर आएंगे लेकिन उन्होंने वही नीति अपनाई जो उनके पूर्ववर्ती सरकारों ने अपनाई थी. अगर अखिलेश के पिछले डेढ़ साल के शासन पर नजर डालें तो राज्य में इस बीच कई सांप्रदायिक दंगे देख चुका है, डकैतों के पुराने गिरोह फिर से अपना सर उठा रहे हैं, लगातार हो रहे बलात्कार या शारीरिक उत्पीड़न की खबरों से भी सरकार की खासी किरकिरी हुई है. राज्य में हो रही लगातार ऐसी घटनाएं यह बताती हैं कि सूबे का नेतृत्व प्रभावशाली व्यक्ति के हाथ में नहीं है. बिगड़ती कानून-व्यवस्था अखिलेश यादव की अयोग्यता दर्शाती है. अगर ऐसा ही चलता रहा तो समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव जो आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं उस पर पानी फिर सकता है.
सुमित गुप्ता

No comments:
Post a Comment