Sunday, 27 January 2013

30 जनवरी: विशेष 

रामराज का मतलब हिन्दुराज नहीं बल्कि ईश्वर का राज: महात्मा गाँधी 

महात्मा गाँधी के जीवन के अनेक प्रेरणादायी रहे है। उनके व्यक्तित्व का
प्रभाव ऐसा था कि वह जहा जाते उनके दर्शनों के लिए अपार भीड़ इक्कठा हो
जाती। 29 मार्च 1918 का दिन था। महात्मा गाँधी ट्रेन से इंदौर पहुचे। वह
अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सम्मलेन के आठवे अधिवेशन मे भाग लेने आये
थे।उनके आने की खबर सुन कर इंदौर और आस पास के इलाके के हजारो लोग स्टेशन
पर पहुच गए थे। उन दिनों रेलगाड़ी मे भारतीयों के लिए तीसरे दर्जे के
डिब्बे लगा करते थे। महात्मा गाँधी जी ऐसे ही एक डिब्बे से उतरे। उनके
सिर पर सफ़ेद टोपी थी। बिना बटन का सादा ढीला कुरता और साधारण सी धोती
पहने थे। कंधे पर कम्बल था। इतने साधारण दिखने वाले गाँधी जी को किसी ने
पहचाना ही नहीं लेकिन जेसे ही पहचाना तो 'गाँधी जी की जय' के नारे गूंज
उठे। भीड़ ने उनके दर्शन करने के लिए उन्हें घेर लिया। बड़ी मुश्किल से
उन्हें स्टेशन के वेटिंग रूम तक लाया गया।  स्टेशन के बाहर भी हजारो लोग
उनके दर्शनों के लिए खड़े थे। उन्हें ले जाने के लिए चार घोड़ो वाली बग्घी
तेयार खड़ी थी लेकिन जनता ने घोड़ो को हटा दिया। लोग उस बग्घी को स्वय
खीचना चाहते थे। गाँधी जी ने जनता के इस प्रेम को देखा तो उन्होने बग्घी
पर बैठने से इंकार कर दिया लेकिन तभी नारे गूंज उठे -' गांधीजी को
हाथोहाथ बग्घी से ले जाएगे। आखिर गांधीजी को जनता के प्रेम के आगे झुकना
पड़ा। लोगो ने हाथोहाथ बग्घी को खीचा। फिर आगे जा कर उसमे घोड़े जोत दिए
गए। गाँधी जी देश भर मे घूम घूम कर स्वतंत्रता का अलख जगा रहे थे।
उन्होंने जनता को स्वराज का मंत्र दिया था। सन 1921 मे वह खंडवा गए। वह
लोगो को अपने देश मे बनी वस्तु का प्रयोग करने को कह रहे थे। वहा उनकी
सभा मे चमकीले कपडे पहने हुए कुछ बालिकाओ ने स्वागत गीत गाया। फिर वहा
उपस्थित नेताओ ने गांधीजी को भरोसा दिलाया कि वे हर तरह से स्वदेशी का
प्रचार करेगे। इस पर गांधीजी ने कहा, मुझे अब भी भरोसा ही दिलाया जा रहा
है, जबकि गीत गाने वाली बालिकाओ ने किनारी गोटे वाले विदेशी कपडे पहनकर
मेरा स्वागत किया।मुझे तो स्वदेशी प्रचार खादी के बारे मे दृढ होना
चाहिए।
एक बार एक मारवाड़ी सज्जन गांधीजी से मिलने आए। उन्होंने सिर पर बड़ी सी
पगड़ी बांध रखी थी। गांधीजी बोले, आपके नाम से तो गाँधी टोपी चलती है और
आपका सिर नगा है। ऐसा क्यों ? गांधीजी ने हस कर कहा, बीस आदमियों की टोपी
का कपडा तो आपने अपने सिर पर पहन रखा है। तब उन्नीस आदमी टोपी कहा से
पहनेगे? उन्ही उन्नीस मे से एक मै हु। सन 1929 की बात है। गांधीजी भोपाल
गए। वहा की जनसभा मे उन्होंने समझाया की मै जब कहता हु कि रामराज आना
चाहिए तो उसका मतलब क्या है? रामराज का मतलब हिन्दुराज नहीं है। रामराज
से मेरा  मतलब है ईश्वर का राज। मेरे लिए तो सत्य और सत्यकार्य ही ईश्वर
है। प्राचीन रामराज का आदर्श प्रजातंत्र के आदर्शों से बहुत कुछ मिलता
जुलता है और कहा गया है की रामराज मे दलित आदमी भी कम खर्च मे और थोड़े
समय मे न्याय प्राप्त कर सकता था। यहाँ तक कहा गया है की रामराज मे एक
कुत्ता भी न्याय प्राप्त कर सकता था।


सुमित गुप्ता 



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