Saturday, 1 May 2010

मई दिवस या सिर्फ दिवस
आज दुनिया भर मे एक मई श्रमिक दिवस के रूप में मनाया जा रहा है लेकिन ये बहुत दुःख की बात है की विकास की धुरी कहे जाने वाले श्रमिक बेबस ओर लाचार है उनकी स्थति अत्यंत दयानिये है वे मोलिक अवश्क्ताओ से भी वंचित है... २००१ की जनगणना के अनुसार देश में श्रमिको की संख्या करीब ४० करोर है जिनमे से ३१.३ करोर मुख्य श्रमिक है ओर ८.९ करोर सीमांत श्रमिक ...... ...नेशनल संपेल रिसर्च के अनुसार संगठित ओर असंगठित दोनों चैत्रो मे कुल ८.९ करोर लोग है इनमे से लगभग २.६ करोर संगठित चेत्र मे ओर शेष ४३.३ करोर असंगठित चेत्र में है असंगठित श्रमिको से मेरा मतलब उन लोगो से है जो दो वक़्त की रोटी के लिए वो सब काम करते है जो उनको मिल जाता है खेतिहर ,मजदूर रिक्शाचालक, निर्माण मजदूर, छोटे किसान, नोकर आदि असंगठित श्रेणी के श्रमिको मे गिने जाते है.... देश के विकास ओर उनन्ती में गेर संगठित श्रमिको का योगदान इस तथ्य से लगाया जा सकता है की देश के जीडीपी का करीब ६० प्रतिशत गेर संगठित चेत्र में है सिचाई, बिजली परियोजनाओ के निर्माण समेत शायद ही कोई ऐसी जगह हो जहा इन लोगो का श्रम न लगा हो लेकिन इनके हितो की चिंता न तो सरकार को है न उद्योग जगत को वैसे तो सरकार ने श्रमिको के कल्याण के लिए अनेक योजनाए शुरू की है लेकिन श्रमिको की स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है .....गेरसंगठित श्रमिको के हितो को धयान में रखते हुए सरकार ने असंगठित सेक्टर कामगार सामाजिक सुरछा बिल २००८ पास किया था इसका लाभ गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले २३ करोर भूमिहीनों मजदूरो को मिलना था.... पिछले कुछ वर्षो में असंगठित चेत्र के श्रमिको की स्थति के लिए कई आयोग बने तथा इन सभी ने श्रमिको की स्थति ख़राब बताई तथा सरकार से उन लोगो पर विशेष धयान देने को कहा..... रिपोर्ट में ये भी कहा गया है की इन लोगो के न तो काम करने के घटे तय है ओर न ही उनको पूरी मजदूरी दी जाती है देश के करीब ३८ करोर असंगठित कामगारों का जीवन स्तर बद से बदतर है इसलिए सरकार ओर साथ ही साथ उद्योग जगत को ये सोचना चाहिए की इन लोगो के जीवन स्तर को कैसे उपर उठाया जाए तभी मई दिवस बनाना सार्थक होगा अन्यथा ...............

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