Wednesday, 10 March 2010

तोड़ फोड़ कि राजनीति.......

अभी हाल ही में मुंबई हाई कोर्ट ने शिवसेना के पूर्व विधायक को प्रदर्शन के दोरान एक होटल को शती पहुचाने के लिए उनके उपर पांच लाख रुपएजमा करने को कहा कोर्ट का कहना था कि आन्दोलन और बंद का आयोजन सवेधानिक अधिकार है लेकिन सम्पति को नुकसान पहुचाने और उत्पात मचाने कि इज़ाज़त किसी को नहीं दी जा सकती ये बड़े दुर्भाग्य कि बात है कि आज शायद ही ऐसा कोई दिन जाता हो जब लोग तोड़ फोड़ न करते हो अभी पिछले दिनों तेलंगाना के मुद्दे परआंधप्रदेश में कई दिनों तक सरकारी सम्पति को नुकसान पहुचाया गया उधर मुंबई में शाहरुक की फ्लिम माय नेम इज खान के विरोध में शिवसेना ने मुंबई व आस पास के जिलो में तोड़फोड़ की लेकिन दोनों जगह की राज्य सरकारों ने शुरू में तो मूकदर्शक बनी रही फिर जब मीडिया में ये रिपोर्ट आने लगी तो करवाई के नाम पर चंद लोगो को जेल में डाल गिया गया बस ......
ये बात सिर्फ मुंबई या आंध्र की नहीं है बल्कि उत्तर प्रदेश वेस्ट बंगाल बिहार या कहे देश के सभी राज्यों की है सभी जगह विरोध के नाम पर तोड़ फोड़ होती है आज यदि किसी राजनितिक दल का कोई आन्दोलन या धरना होता है तो जितना जयादा तोड़ फोड़ होती है वो उतना सफल माना जाता है कियोकी वो जानते है की बिना तोड़ फोड़ के उनको मीडिया में जगह नहीं मिलेगी पर इस सवाल का कभी उत्तर नहीं मिलता की जिन लोगो ने ये अपराध किये क्या उन्हें कोई सजा मिली ?
क्या उनकी पहचान हो गई ? क्या उनमे से कोई जेल की सलाखों के पीछे पंहुचा ? लोगो को अब यह विश्वाश हो गया है की भीड़ के रूप में इक्क्ठे होकर जो कुछ भी किया जाई उसकी सजा नहीं मिलेगी इसीलिये हर साल अपने देश में अरबो रुपए की सम्पति फूक दी जाती है वैसे यह गुस्सा भी खास किस्म का होता है क्या कभी किसी ने सरकार से गुस्सा होकर अपने घर में आग लगाई है या अपनी कार तोड़ी है आज यदि कही पे तोड़फोड़ होता है तो सरकार कुछ नहीं करती कियोकी उसे डरहै की कही उसका वोट बैंक न खिसक जाये आज यदि किसी बात पर छात्रों को गुस्सा आता है तो वे कॉलेज के भवन वाहन आदि में आग लगा देते है रोगियों के परिजन हॉस्पिटल के भवन और अन्य वस्तुओ को नुकसान पहुचाते है लेकिन इससे हानि किसको होती है उस आम जनता को जो इसका उपयोग करती है आज बसों में कोई मंत्री नहीं बैठता या सरकारी हॉस्पिटल में कोई आमिर आदमी नहीं जाता है .......
जाता है तो सिर्फ ओर सिर्फ हमारे जेसे आम आदमी .......तो फिर कियो हम अपनी सम्पति को नुकसान पहुचाये लेकिन जिस तरह से मुंबई हाई कोर्ट ने ये फेसला दिया है इससे इस बात की आशा कि जा सकती है कि यदि न्यायालय के साथ साथ सरकार भी थोडा सख्ती से पेश आये तो इस तोड़ फोड़ से निजाज़ मिल सकता है .............

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