Thursday, 13 May 2010


तारीख पे तारीख तारीख पे तारीख तारीख पे तारीख .......
एस एच कपाडिया ने सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के पद के रूप में शपथ ले ली... इसी के साथ उनके उपर एक नई जिम्मेदारी आ गई... क्योकि पिछले कई दिनों से न्यायपालिका के उपर कई तरह के आरोप लगे है चाहे वह दिनाकरण का मामला हो ,न्यायपालिका को आरटीई के दयारे में लाने का मामला हो या फिर भ्रस्टाचार... आज न्याय को लेकर भारतीयों के मन से भरोसा हिल रहा है इसका कारण है यह की नयाय मिलने मे देरी ....आज किसी भी मुद्दे पर फ़ेसला आने मे सालोसाल लग जाते है यह नयाय न मिलने के बराबर है अदालतों मे लगभग तीन करोर मामले लंबित है १५ १५ साल तक निर्णय के लिए प्रतीचा करना पड़ता है... हत्या के कुछ मामले मे सुनवाई हुए एक दशक हो जाने पर भी फ़ेसला नहीं मिलता अभी हाल ही मे कानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने १५००० रिटायर जजों ओर उन लोगो की नियुक्ति सम्बन्धी एक योजना को मंजूरी दे दी है जो लंबित मामलों को निपटा सके.... इसके बावजूद बहुत कुछ इस पर निर्भर करेगा की फेसले कितने जल्दी आते है... उन हथकंडो मे ही बहुत सा समय व्यर्थ हो जाता है क्योकि निचली अदालतों से लेकर सर्वोच्य न्यायालय तक एक लम्बी क़ानूनी प्रक्रिया है इसमे से कुछ तो इतनी जटिल है की किसी मुद्दे पर एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक केस ट्रान्सफर हो जाता है.... इनमे से कुछ प्रमुख मुद्दे है जैसे बाबरी माजिद , १९८४ के दंगे ,कावेरी जल विवाद.... यदि सही मायने मे इस दिशा मे काम करना है तो न्यायक सुधार की सख्त जरुरत है
नये मुख्य न्यायाधीश अपने कार्यकाल मे कुछ ऐसा करे जिससे न्यायपालिका मे सुधार की आशा की जा सके ये पहल खुद न्यायपालिका को ही करना है की उसकी प्रतिष्ठा को कैसे बचाया जा सके ये सविंधान के लिए भी उपयुक्त होगा की न्यायपालिका मे बाहरी हस्तछेप न के बराबर हो नहीं तो मुझे हिंदी फिल्म दामनी का वो डायलोग याद आता है जिसमे सनी देयोल कहता है की तारीख पे तारीख , तारीख पे तारीख, तारीख पे तारीख .......

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