Wednesday, 10 March 2010

बोलो लेकिन सोच समझकर

यदि कोई मुझसे पूछे की राखी सावंत व बंगलादेशी लेखिका तेस्लिमा नसरीन में क्या समानता हे तो मेरा जवाब होगा की दोनों को पता हे की मीडिया में किस तरह से जगह बनाई जाती हे जिस प्रकार राखी सावंत जब तब कोई ऐसा बखेड़ा खड़ा क़र देती हे या यू कहे कोई ऐसी बात बोल देती हे जिससे वो मीडिया विशेषकर इलेक्ट्रोनिक मीडिया के केंद्र में आ जाती हे ठीक उसी प्रकार तेस्लिमा नसरीन समय समय पर कोई ऐसा लेख लिखती हे या बोलती हे जिससे समाज के एक वर्ग विशेष को नागवार गुजरता हे अभी हाल ही में उनके नाम से एक कन्नड़ अख़बार में एक लेख लिखा जिसमे मुस्लिम महिलाओ के बुरखा सम्बन्धी बयान का जिक्र किया गया हे हालाकि उन्होंने इस लेख से किनारा क़र लिया हे मै इस बात मै नहीं जाउगा कि ये लेख सही हे या गलत लेकिन एक बात तो सही हे कि बिना चिंगारी के आग नहीं लगती ये पहेली बार नहीं हे कि किसी मुद्दे पर उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया हो
वह एक प्रखर लेखिका हें लेकिन उनको इस बात का एहसास होना चाहिए कि उनका एक एक शब्द समाज मै बड़ा असर डालता हें वो पिछले कई वर्षो से भारत में रह रही हें क्योकि बंगलादेश की सरकार ने उनको देश निकला दे दिया हें इसलिये वो अब भारत को ही अपना घर मानती हें लेकिन इसके साथ ही साथ उनसे ये अपेछा की जाती हें कि वो ऐसा कोई काम न करे जिससे भारत कि सामाजिक व धार्मिक सद्भ्वाना को किसी भी तरह का कोई असर पड़े

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